योग (Yoga in Hindi)

योग (Yoga in Hindi)

योग क्या है? (What is Yoga In Hindi)

भारत में योग (Yoga) की सर्वप्रथम उत्पत्ति वर्तमान समय से तकरीबन 3000 वर्ष पहले हुई थी। भारत में अलग-अलग प्रकार की कला संस्कृति के साथ-साथ योग की भी बहुत अहम भूमिका रही है। योग (Yoga) का अर्थ होता है मन ,आत्मा, शरीर की शक्ति को स्थिर रखना। हालांकि वर्तमान समय में हम योग को ज्यादातर व्यायाम के रूप में देखते हैं। जैसे हम व्यायाम मैं अलग-अलग प्रकार की क्रियाएं यानी कि सांस लेना सांस छोड़ना यह सभी शैलियां योग का ही हिस्सा है।

योग करने के लिए हमें हमारे मन और मस्तिष्क दोनों के विचारों को स्थिर रखना पड़ता है। यह इतना आसान भी नहीं है और ना ही इतना मुश्किल क्योंकि योगाभ्यास करने से हमें इन दोनों चीजों पर बेहतर नियंत्रण और अनुशासन देखने को मिलता है।

सन 1970 के दशक में योग काफी तेजी से प्रचलित होने लगा और धीरे-धीरे इसे बहुत समय बाद वापिस लोगों द्वारा अपनाया जाने लगा। इसमें सबसे ज्यादा प्रचलित होने वाला योग प्राणायाम था जिसमें तेजी से सांस को छोड़ना और तेजी से सांस को अंदर लेना होता था। इससे लोगों को कई सारी बीमारियां और रोगों से छुटकारा पाने में बहुत ज्यादा मदद मिली।

योग के भिन्न भिन्न प्रकार (Types Of Yoga In Hindi)

योग के बहुत सारे अलग-अलग प्रकार और शैलियाँ होती है। योग हमारे शरीर में शक्ति, समृद्धि विचारों की एकता और लचीलापन आदि का बोध कराता है। तो चलिए अब हम बताते हैं आपको योग के प्रकार और उन्हें किस प्रकार किया जाता है ।

1.पावर योग (Power Yoga):

पावर योग एक ऐसा योग है जिसका विकास अन्य योगों से काफी अलग तरीके से हुआ है। 1980 में कुछ प्रैक्टिशनर ने अष्टांग प्रणाली को ध्यान में रखते  हुए सक्रिय और शारीरिक प्रकार के इस पावर योग का विकास किया।इस योग के करने से हमें ऊर्जा और शक्ति का बोध होता है। यह योग के अधिकांश पारंपरिक रूपों की तुलना में अधिक कैलोरी जलाता है इसलिए पावर योग वजन घटाने में मदद कर सकता है।

2.अष्टांग योग (Ashtang Yog):

यह योग सन 1970 के दशक में बहुत ही ज्यादा लोगों के बीच प्रचलित हुआ था। अष्टांग योग में मुख्य रूप से छह प्रकार की मुद्राओं और शैलियों का जुड़ा है जिसमें काफी तेजी से सांस को अंदर बाहर छोड़ना होता है। जिसे हम कपालभाति के नाम से भी जानते हैं।

3.बिक्रम योग (Bikram Yoga):

आपने हॉट योगा का नाम तो सुना ही होगा , जी हां विक्रम योग को आज वर्तमान समय में हॉट योगा के नाम से जाना जाता है। विक्रम योग यानी कि हॉट योगा को करने के लिए हमें अत्यधिक तापमान वाले स्थानों की आवश्यकता होती है। इसमें अलग-अलग प्रकार की कुल 26 मुद्राएं होती हैं।

4.शिवानंद: 

यह एक प्रणाली है जो पांच-बिंदु दर्शन पर आधारित है। यह दर्शन बताता है कि एक स्वस्थ योगिक जीवन शैली बनाने के लिए उचित श्वास, विश्राम, आहार, व्यायाम और सकारात्मक सोच एक साथ काम करते हैं। आमतौर पर यह एक ही 12 मूल आसनों का उपयोग करता है, जो सूर्य नमस्कार और सवाना आसनों द्वारा बुक किया गया है।

5.विनियोग (Viniyoga): 

विनियोग शारीरिक क्षमता की परवाह किए बिना किसी भी व्यक्ति को अनुकूलित कर सकता है। विनियोग के शिक्षकों को गहन प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है और वे शरीर रचना और योग चिकित्सा के विशेषज्ञ होते हैं।

6.कृपालु योग:

कृपालु योग हमारे शरीर को जानने उसको अपनाने और अच्छे से सीखने की समझ देता है। इससे आपका मन और मस्तिष्क दोनों शांत रहते हैं। कृपालु योग अधिकतर छात्रों द्वारा किया जाता है क्योंकि छात्रों को अपने मन और मस्तिष्क को कंट्रोल करने में काफी समस्या होती है। यह सांस लेने और छोड़ने से शुरू होता है और अंत में विश्राम की स्थिति में यह समाप्त किया जाता है।

7.कुंडलिनी योग:

कुंडलिनी योग जैसा कि इसका नाम है वैसे ही इसकी मुद्रा है। कुंडलिनी योग को करने के लिए हमें सांप की तरह अपने संपूर्ण शरीर को कुंडलीता कर लेना है। यह हमारे मन के अंदर छिपी हुई ऊर्जा को उजागर करता है।

योग करने से होने वाले लाभ (Benefits Of Yoga In Hindi)

  1. योग हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद और लाभदायक होते हैं।
  2. हमारे शरीर की मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है और साथ ही साथ संपूर्ण शरीर में लचीलापन लाता हैं।
  3. वृद्धावस्था में योग करने पर यह रीड की हड्डी ,जोड़ों का दर्द और ब्लड प्रेशर को सामान्य रखता है।
  4. योग हमारी अधिवृक्क ग्रंथियों को भी नियंत्रण में रखता है। इससे हमारा ध्यान अच्छे से एक जगह पर केंद्रित होता है।
  5. विद्यार्थी वर्ग के लिए योग बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि यह उन्हें ध्यान केंद्रित करने मन के अंदर संतुलन बेहतर बनाने और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को तनाव मुक्त बनाने में काफी ज्यादा मदद करता है।
  6. अच्छी पाचन शक्ति और उच्च रक्तचाप के लिए योगा सबसे कारगर उपाय साबित होता है।
योग (Yoga in Hindi)

योग के नियम (Some Rules For Yoga In Hindi)  :-

योग करते समय आप हमेशा इन नियमों का अवश्य पालन करें ताकि आपको योगा करते समय किसी भी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े :-

  1. योगा हमेशा किसी प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना प्रारंभ करें।
  2. योग करने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय या फिर सूर्यास्त का होता है।
  3. Yoga करने से दो-तीन घंटे पहले आप किसी भी प्रकार के भोजन का सेवन ना करें हमेशा इसे खाली पेट ही करें।
  4. योग करते समय ज्यादा भारी कपड़े ना पहने मात्र हल्के कपड़े पहने सूती और पायजामा।
  5. जितना हो सके आप लोग को आराम से करें और अपने शरीर में जरूर से ज्यादा बल और जबरदस्ती बिल्कुल भी ना करें।
  6. प्राणायाम (pranayama) करते समय आप हमेशा यह ध्यान रखें कि सास को कब अंदर लेना है और कब छोड़ना है। ना हम को अच्छे से अभ्यास के द्वारा सीखने के बाद ही एकांत में करें।

इसके अलावा योग करते समय किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श लेवे।

योग की शुरुआत के लिए टिप्स (Yoga For Beginners Hindi) :-

जब भी हम कोई भी नया कुछ सीखने का प्रयास करते हैं तो हमें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ठीक इसी प्रकार योगाभ्यास पहली बार करने पर आप इन खास बातों का ध्यान अवश्य रखें और इन टिप्स का इस्तेमाल आप अपने योगाभ्यास को बेहतर बनाने में भी काम में ले सकते हैं।

  • योगाभ्यास करते समय हमेशा आप अपने मन को शांत रखकर करें। इससे आपको अपना ध्यान केंद्रित करने में आसानी होगी।
  • योगाभ्यास करते समय आप शुरुआती दौर में वही आसन करें जो आप आसानी से कर सकते हैं।
  • अपने शरीर को ढीला छोड़ते हुए सभी आसन करें ना कि शरीर को ज्यादा बलपूर्वक इस्तेमाल करके।
  • जब भी आप कपालभाति या फिर प्रणाम करें तो अपनी सांसो पर नियंत्रण अवश्य रखें।
  • आसन और योगा करते समय आप दरिया फिर हलकान कोमल कपड़ा बिछाकर करें।
  • शुरुआती दौर में आप एक आसन करने के बाद थोड़ा समय आराम अवश्य करें और उसके पश्चात ही अगले आसन की तैयारी करें।
  • जब आप धीरे-धीरे योगा में अच्छे से निपुण होते जाएंगे तो अपने आराम करने की समयावधि को जरुर नियंत्रित करें।

योग करने के दौरान ध्यान रखने वाली सावधानियां :-

  • यदि आप योग करने का सोच रहे हैं तो सर्वप्रथम आप योग किसी प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में रहकर ही करें। बहुत बार ऐसा होता है कि जाने अनजाने में हम योग की मुद्रा को सही से नहीं कर पाते हैं जिसके कारण हमें आंतरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • यदि आपको योग करते समय किसी भी प्रकार की चोट लगती है तो इसे आप धीरे-धीरे अभ्यास के द्वारा कम कर सकते हैं।इसके अलावा यदि आप किसी बड़ी बीमारी से संक्रमित हैं और आप योगा करना चाहते हैं तो सर्वप्रथम आप अपने चिकित्सक से इसकी राय अवश्य लेवे।
  • कभी भी किसी भी प्रकार के योगा की मुद्रा को अपनी मर्जी के मुताबिक ना करें हमेशा मार्गदर्शक के प्रशिक्षण में या फिर अच्छे से सीखने के बाद ही करें।अन्यथा योगा करने के पश्चात आपको किसी भी प्रकार की समस्या दर्द पीड़ा का सामना करना पड़ता है तो आप अपने नजदीकी चिकित्सक से संपर्क करें।

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